
पेंड्रा में जमींदारी काल की ऐतिहासिक परंपरा का भव्य उत्सव, भोजली मेले में उमड़ा जनसैलाब
कजालिया रैली से लेकर लोकगीतों तक दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रंगीन झलक, पार्षद सुनीता गोलू राठौर के नेतृत्व में हुआ भव्य आयोजन
पेंड्रा। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा नगर में जमींदारी काल से चली आ रही ऐतिहासिक और गौरवशाली भोजली मेले की परंपरा इस वर्ष भी पूरे उत्साह, उमंग और पारंपरिक रंग के साथ देखने को मिली। वार्ड क्रमांक 03 स्थित सरकारी पारा मैदान में 29 अगस्त को मेला आयोजक समिति एवं वार्ड पार्षद श्रीमती सुनीता गोलू राठौर के नेतृत्व में भव्य कजालिया रैली एवं विशाल भोजली मेले का आयोजन किया गया। आयोजन में नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और देर रात तक मेले में उत्साह का माहौल बना रहा।


भोजली मेले में जहां एक ओर पेंड्रा की पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और जमींदारी विरासत की झलक दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर लोकगीत, देवी भक्ति गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। मेले में बड़ी संख्या में नगरवासी एवं आसपास के क्षेत्र से लोग पहुंचे, जिससे पूरा सरकारी पारा मैदान लोगों की भीड़ से गुलजार नजर आया।
कजालिया रैली ने बांधा समां
आयोजन की शुरुआत पारंपरिक कजालिया रैली से हुई। रैली में लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली पर्व की खुशियां मनाईं। रैली के दौरान छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की खूबसूरत झलक देखने को मिली। बुजुर्गों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक सभी वर्ग के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।

आयोजकों का कहना है कि भोजली मेला केवल मनोरंजन और खरीदारी का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पेंड्रा की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है।
लोक कलाकार प्रीतम पड़वार ने बांधा समां
शाम ढलते ही मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर शुरू हुआ। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार श्री प्रीतम पड़वार ने अपनी सुमधुर आवाज में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों और देवी भक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। जैसे-जैसे कलाकार ने अपनी प्रस्तुति आगे बढ़ाई, वैसे-वैसे पूरा मेला परिसर तालियों और उत्साह से गूंजता रहा।

लोकगीतों पर दर्शक झूमते नजर आए। पारंपरिक गीत-संगीत ने लोगों को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से जोड़ दिया। बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए मेले में विभिन्न प्रकार के मनोरंजन एवं आकर्षण भी मौजूद रहे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
भव्य आयोजन का शुभारंभ जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं पेंड्रा जमींदार परिवार के वंशज राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, नगर पालिका पेंड्रा अध्यक्ष श्री राकेश जालान, उपाध्यक्ष शरद गुप्ता, अनूप विश्वकर्मा, राकेश चतुर्वेदी, वार्ड पार्षद सुनीता राठौर सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर विजेंद्र पाण्डेय, भोलू राठौर, दौलत राठौर, राका राठौर, नारायण राठौर, सरवन यादव, पंकज भट्ट सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे। अतिथियों एवं आयोजन समिति द्वारा पारंपरिक भोजली पर्व के महत्व और पेंड्रा की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
राजा उपेंद्र बहादुर सिंह बोले—यह सिर्फ मेला नहीं, हमारी जीवंत विरासत है
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं पेंड्रा जमींदार परिवार के वंशज राजा उपेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि भोजली मेला पेंड्रा की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि भोजली मेला केवल एक मेला नहीं, बल्कि हमारे गढ़ की जीवंत विरासत है। यह जमींदारी काल से चली आ रही पेंड्रा की सबसे प्राचीन परंपराओं में से एक है। उन्होंने मेले में शामिल होने पहुंचे नगरवासियों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वजों द्वारा शुरू की गई इस सांस्कृतिक परंपरा को आने वाले समय में और अधिक भव्य एवं विशाल रूप देने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में भी हमारी पुरानी परंपराएं और संस्कृति जीवित रहें, इसके लिए नई पीढ़ी को भी इन आयोजनों से जोड़ना जरूरी है। भोजली जैसे पारंपरिक आयोजन हमारी जड़ों, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान को मजबूत करते हैं।
पार्षद सुनीता गोलू राठौर के नेतृत्व में सफल आयोजन
भोजली मेले के सफल आयोजन में वार्ड पार्षद श्रीमती सुनीता गोलू राठौर एवं मेला आयोजक समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन को लेकर पहले से ही तैयारियां की गई थीं, जिसके चलते कार्यक्रम व्यवस्थित एवं आकर्षक नजर आया।
पार्षद सुनीता गोलू राठौर ने आयोजन में पहुंचे सभी अतिथियों, नगरवासियों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पेंड्रा की ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भोजली मेला हमारी संस्कृति और हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ पर्व है और आने वाले वर्षों में इसे और भी बड़े स्तर पर आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।
परंपरा, आस्था और मनोरंजन का दिखा अनूठा संगम
पेंड्रा के सरकारी पारा मैदान में आयोजित भोजली मेला वास्तव में परंपरा, आस्था, संस्कृति और मनोरंजन का अनूठा संगम बन गया। एक ओर जहां लोगों ने वर्षों पुरानी परंपरा को करीब से महसूस किया, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
मेले में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने आयोजन की सफलता को बयां किया। देर शाम तक मैदान में लोगों की चहल-पहल बनी रही। दुकानों और विभिन्न मनोरंजन साधनों के बीच बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्ग के लोग मेले का आनंद लेते नजर आए।
नई पीढ़ी तक पहुंच रही पुरखों की विरासत
पेंड्रा का भोजली मेला सिर्फ एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी के रूप में सामने आया। जमींदारी काल से चली आ रही इस परंपरा को आज भी उसी उत्साह के साथ मनाया जाना पेंड्रा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
आयोजकों और नगरवासियों की उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भोजली मेले को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि पेंड्रा की इस ऐतिहासिक परंपरा की पहचान जिले और प्रदेश स्तर पर और मजबूत हो सके।
कुल मिलाकर, 29 अगस्त को आयोजित भोजली मेला पेंड्रा की ऐतिहासिक विरासत, लोक संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का शानदार प्रतीक बनकर सामने आया। कजालिया रैली, पारंपरिक आयोजन और प्रीतम पड़वार के लोकगीतों ने मेले को यादगार बना दिया।















